मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
बृहत्संहिता • अध्याय 86 • श्लोक 35
विषपातकगोस्वामिकुहकज्ञास्ततः परम् । धनवानी क्षणीक मालाकारः परं ततः ॥
वायव्य और उत्तर दिशा के अन्तर्गत प्रदेश के त्रिभाग में क्रम से विष करे नाश करने वाले, गौस्वामी (गोमान्) और इन्द्रजाल विद्या जानने वाले स्थित रहते हैं। उता और ईशान कोण के अन्तर्गत प्रदेश के त्रिभाग में धनी, दैवज्ञ और माली ये तीन स्थित रहते हैं।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
बृहत्संहिता के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

बृहत्संहिता के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें