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बृहत्संहिता • अध्याय 86 • श्लोक 34
नैर्ऋतीवारुणीमध्ये शौण्डिकः शाकुनी हिंस्त्रो वायव्यापश्चिमान्तरे ॥
पश्चिम और नैऋत्य कोण के अन्तर्गत प्रदेश के त्रिभाग में क्रम से लौ, प्रसूता ती और चोर स्थित रहते हैं। वायज्य और पश्चिम दिशा के अन्तर्गत प्रदेश के विभाग में कलाल, पक्षी को मारने वाले और हिंसा करने वाले स्थित रहते है।
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