न ग्राम्योऽरण्यगो ग्राह्यो नारण्यो ग्राम्यसंस्थितः । दिवाचरो न शर्वयाँ न च नक्तञ्चरो दिवा ॥
वन में गाँव के शकुन, गाँव में वन के शकुन, रात्रि में दिन के शकुन और दिन में रात्रि के शकुन का ग्रहण नहीं करना चाहिये।
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