यदि दो आदि शकुनों का दर्शन हो तो गति, जाति, बल, स्थान, हर्ष सत्त्व, स्वर-
इनमें जो बली हो, उसी के अनुसार शुभाशुभ फल प्राप्त होता है। अपने स्थान से
अनुलोम गति वाले शकुन बली होते हैं; लेकिन इनसे विपरीत होने पर सभी शकुन
निर्बल होते हैं।
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