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बृहत्संहिता • अध्याय 86 • श्लोक 18
दशधैवं प्रशान्तोऽपि सौम्यस्तृणफलाशनः । मांसामेध्याशने रौद्रो विमिश्रोऽन्नाशनः स्मृतः ॥
पूर्वोक्त दश प्रकार के शान्त शकुन हैं। उनमें तृण और फल को खाने वाले सौम्य, मांस और विष्ठा आदि अपवित्र पदार्थ को खाने वाले रौद्र और अन्न को खाने वाले मिश्र (न सौम्य न रौद्र) कहे गये हैं।
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