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बृहत्संहिता • अध्याय 86 • श्लोक 13
पथ्यात्मानं नृपं सैन्ये पुरे चोद्दिश्य देवताम्। सार्थे प्रधानं साम्ये स्याज्जातिविद्यावयोऽधिकम् ॥
मार्ग में गमन करने वाले मनुष्य के ऊपर, सैन्य में राजा के ऊपर, पुर में देवता (नगर-स्वामी) के ऊपर, जन-समुदाय में प्रधान के ऊपर, प्रधानों के साम्य में जाति के ऊपर, जातियों के साम्य में विद्या के ऊपर और विद्या के साम्य में वयोधिक के ऊपर शाकुन का फल पड़ता है।
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