मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
बृहत्संहिता • अध्याय 84 • श्लोक 1
वामावर्ती मलिनकिरणः सस्फुलिङ्गोऽल्पमूर्तिल क्षिप्रं नाशं व्रजति विमलस्नेहवर्त्यन्वितोऽपि । दीपः पापं कथयति फलं शब्दवान् वेपनश्च व्याकीर्णार्चिर्विशलभमरुद्यश्च नाशं प्रयाति ।।
जिस दीप की शिखा वामावर्त होकर भ्रमण करती हो, मलिन किरण वाली हो, जिनमें चिनगारियाँ निकलती हों, छोटी शिखा से युत हो, निर्मल तेल और बत्ती से युत होने पर भी शीघ्र बुझ जाती हो, शब्दयुत, कम्पित, विखरे किरणों चाली हो, विना शलभ के गिरे या विना वायु के चले बुझ जाती हो-ऐसा दीपक पापफल देने वाला कहा गया है।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
बृहत्संहिता के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

बृहत्संहिता के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें