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बृहत्संहिता • अध्याय 82 • श्लोक 7
प‌विंशतिः सहस्राण्येकस्य मणेः पलप्रमाणस्य । कर्षत्रयस्य विंशतिरुपदिष्टा पद्मरागस्य ॥
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