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बृहत्संहिता • अध्याय 82 • श्लोक 6
यस्तं विभर्ति मनुजाधिपतिर्न तस्य दोषा भवन्ति विषरोगकृताः कदाचित् । राष्ट्र च नित्यमभिवर्षति तस्य देवः शत्रूच नाशयति तस्य मणेः प्रभावात् ॥
जो राजा पूर्वोक्त मणि को धारण करता है, उसको कभी भी विष या रोगसम्बन्धी दोष नहीं होते। उसके राज्य में इन्द्र सदा वर्षा करते हैं और उस मणि के प्रभाव से बह राजा अपने शत्रुओं का नाश करने में समर्थ होता है।
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