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बृहत्संहिता • अध्याय 82 • श्लोक 5
प्रमरशिखिकण्ठवर्णो दीपशिखासप्रभो भुजङ्गानाम् । भवति मणिः किल मूर्धनि योऽनर्षेयः स विज्ञेयः ॥
प्रमर या मयूरकण्ठ के समान वर्ष वाला, दीपशिखा के समान कान्ति बाला और अमूल्य मणि सर्पों के शिर में होता है।
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