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बृहत्संहिता • अध्याय 82 • श्लोक 3
स्निग्धः प्रभानुलेपी स्वच्छोऽर्चिष्मान् गुरुः सुसंस्थानः । अन्तः प्रभोऽतिरागो मणिरत्नगुणाः समस्तानाम् ॥
स्निग्ध, कान्ति से दोपित, स्वच्छ, कान्ति से मुठ, भारी, सुन्दर आकार वाले, मध्य में प्रभायुक्त, अति लोहित, प्रेत गुणों से युक्त- ये सभी पद्मराग मणि के प्रधान गुष कहे गये हैं।
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