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बृहत्संहिता • अध्याय 81 • श्लोक 36
एकावली नाम यथेष्टसङ्ख्या हस्तप्रमाणा मणिविप्रयुक्ता । संथोजिता या मणिना तु मध्ये यष्टीति सा भूषणविद्भिरुक्ता ॥
पूर्वेत एक हाथ लम्बी माता के मध्य में मणियासुकीकपिरोई जव माला में मणियो तथा विषईजोको टुकार' एक केनेनेही' नाम से
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