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बृहत्संहिता • अध्याय 81 • श्लोक 34
मन्दरसंज्ञोऽष्टाभिः पञ्चलता हारफलकमित्युक्तम्। सप्ताविंशतिमुक्ता हस्तो नक्षत्रमालेति ॥
चौमत लड़ी वाली भाला की संज्ञा 'अर्थहार' चौचन सदी वालीमा की 'शीमकता', बत्तीस लड़ी वाली माता को संज्ञा 'गुच्छ', बीस लड़ी
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