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बृहत्संहिता • अध्याय 81 • श्लोक 33
मन्दरसंज्ञोऽष्टाभिः पञ्चलता हारफलकमित्युक्तम्। सप्ताविंशतिमुक्ता हस्तो नक्षत्रमालेति ॥
तो विच्छन्द एक आठ सड़ी जाली अथवा इक्यासी लहीली माता की लम्बाई हो तो देवन्दसंज्ञा है।
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