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बृहत्संहिता • अध्याय 81 • श्लोक 31
सुरभूषणं लतानां सहस्रमष्टोतरं चतुर्हस्तम् । इदुच्छरो नाम्ना विजयच्छन्दस्तदर्थेन ॥
एक हजार आठ सही बाली मोतियों के माला की लम्बाई चार हाथ हो तो बह माता 'इन्दुच्छन्द' संज्ञक होती है।
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