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बृहत्संहिता • अध्याय 81 • श्लोक 3
बहुसंस्थानाः स्निग्धाः हंसाभाः सिंहलाकराः स्थूलाः । ईषत्ताम्राः श्वेतास्तमोवियुक्ताश्च ताम्राख्याः ॥
सिंहलक देश में अनेक आकृति वाले, स्निग्ध, हंस के समान सफेद और स्थूल मोती उत्पन्न होते हैं। ताम्रपर्णी नदी में कुछ लाल, सफेद और निर्मल मोती निकलते हैं।
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