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बृहत्संहिता • अध्याय 81 • श्लोक 27
अपहरति विषमलक्ष्मीं क्षपयति शत्रून् यशो विकाशयति। भौजङ्गं नृपतीनां धृतमकृतार्थं विजयदं च ॥
विना मोल किये सर्वोत्पन्न मोती को धारण करने से राजाओं के विष और अलक्ष्मी का नाश, शत्रुओं को भय, यश का विस्तार तथा विजय करता है।
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