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बृहत्संहिता • अध्याय 81 • श्लोक 22
नैषामर्घः कार्यो न च वेधोऽतीव ते प्रभायुक्ताः । सुतविजयारोग्यकरा महापवित्रा घृता राज्ञाम् ॥
उन प्रभायुक्त महापवित्र मोतियों को धारण करने से राजाओं को पुत्र, विजय और आरोग्य की प्राप्ति होती है।
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