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बृहत्संहिता • अध्याय 81 • श्लोक 17
पिक्कापिच्चार्यार्धा रवकः सिक्थं त्रयोदशाद्यानाम् । परतो निगराश्रूर्णाश्चाशीतिपूर्वाणाम् ॥
एक धरण पर १३ मोती चढ़े तो 'पिक्का', सोलह मोती चढ़े तो 'पिच्चा', पच्चीस मोती चढ़े तो 'अर्थ', तीस मोती चढ़े तो 'रखक', चालीस मोती चढ़े तो 'सिक्थ' और पचपन मोती चढ़े तो 'निगर' कहलाता है। इसके बाद अस्सी मोती से लेकर पाँच सौ तक एक धरण पर चढ़े तो उसको 'चूर्ण' कहते हैं ।
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