वारुणमबलागुह्योपमं भवेत् कर्णिकारपुष्यनिभम् । शृङ्गाटकसंस्थानं व्याघ्राक्षिनिभं च हौतभुजम् ॥
स्त्री की भग के समान आकृति वाले होरे का वरुण, कर्णिकारपुष्प के समान, सिंघाड़े के समान (त्रिभुजाकार) या बाघ के नेत्र के समान हीरे का अग्नि तथा अशोक के पुष्प के
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