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बृहत्संहिता • अध्याय 80 • श्लोक 6
वेणातटे विशुद्धं शिरीषकुसुमप्रभं च कौशलकम् । सौराष्ट्रकमाताघ्रं कृष्णं सौर्पारकं वज्रम् ॥
वेणा नदी के तट पर सर्वथा शुद्ध, कौशल देश में शिरीष पुष्प के समान, सौराष्ट्र देश में कुछ लाल, सूरपारक देश में काला, हिमवान् पर्वत पर
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