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बृहत्संहिता • अध्याय 80 • श्लोक 4
वनेन्द्रनीलमरकतकर्केतरपद्मरागरुधिराख्याः वैदूर्यपुलकविमलकराजमणिस्फटिकशशिकान्ताः ॥
पढ़ (होरा), इन्द्रनील (नीलम), मरकत (प), कला, पण, भिर वैदूर्य, पुलक, विपालक, राजमणि स्कटिक द्रकान्त,
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