किसी का भत है कि मतसंज्ञक वैच्च से रत्न परे उत्पत्ति हुई है। कोई दधीचि मुनि की अरिय से रलोत्पत्ति मानते है। कोई ध्वी के स्वभाव से उपलों में विचित्रता आकर रत्न हो जाता है-ऐसा मानते है।
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