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बृहत्संहिता • अध्याय 80 • श्लोक 14
सर्वद्रव्याभेद्यं लघ्वम्भसि तरति रश्मिवत् स्निग्धम् । तडिदनलशक्रचापोपमं च वज्रं हितायोक्तम् ॥
जो होरा किसी भी वस्तु से टूटने वाला न हो, अल्प जल में भी किरण की तरह तैरता रहे, निर्मल हो एवं बिजली, अग्नि या इन्द्रधनुष के समान वर्ण वाला हो, वह कल्याणकारी कहा गया है।
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