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बृहत्संहिता • अध्याय 80 • श्लोक 10
वायव्यं च यवोपममशोककुसुमप्रभं समुद्दिष्टम् । स्रोतः खनिः प्रकीर्णक्षमित्याकरसम्भवस्त्रिविधः ॥
समान वर्ण वाले हीरे का वायव्य देवता है। नदी के प्रवाह, खान, प्रकीर्णक ( जिस भूमि में मणि होती है अर्थात् समुद्र आदि) - ये तीन हीरों की उत्पत्ति के आकरस्थान कहे गये हैं।
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