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बृहत्संहिता • अध्याय 80 • श्लोक 1
रत्नेन शुभेन शुभं भवति नृपाणामनिष्टमशुभेन । यस्मादतः परीक्ष्यं दैवं रत्नाश्रितं तज्ज्ञैः ॥
शुभ रत्न धारण करने से राजाओं का शुभ और अशुभ रत्न धारण करने से राजाओं का अशुभ होता है। इसलिये रत्नज्ञों के द्वारा रत्नगत दैव (शुभाशुभ फल) को परीक्षा करनी चाहिये।
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