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बृहत्संहिता • अध्याय 8 • श्लोक 9
वैशाखे धर्मरता विगतभयाः प्रमुदिताः प्रजाः सनृपाः । यज्ञक्रियाप्रावृत्तिः निष्पत्तिः सर्वसस्यानाम् ॥
बृहस्पति के वैशाख वर्ष में प्रजा पुण्य कर्मों में प्रवृत्त होगी, भय रहित होगी और अपने राजाओं सहित सुखी रहेगी। लोग यज्ञ और अन्य अनुष्ठान करने में लगे रहेंगे और सभी प्रकार की फसलें प्रचुर मात्रा में होंगी।
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