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बृहत्संहिता • अध्याय 8 • श्लोक 50
भाग्ये युगे दुन्दुभिसंज्ञमाद्यं सस्यस्य वृद्धिं महतीं करोति । अंगारसंज्ञं तदनु क्षयाय नरेश्वराणां विषमा च वृष्टिः ॥
बारहवें युग में, पहले वर्ष का नाम दुंदुभी होगा और इसमें प्रचुर मात्रा में खाद्यान्न की वृद्धि होगी। इसके बाद उदगारी या रुधिरोदगारी आती है जिसमें राजाओं को कष्ट होगा और बारिश भी असमान और अनियमित होगी।
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