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बृहत्संहिता • अध्याय 8 • श्लोक 40
ईतिप्राया प्रचुरपवना वृष्टिः अब्दे तु पूर्वे मन्दं सस्यं न बहुसलिलं वत्सरेऽतो द्वितीये । अत्युद्वेगः प्रचुरसलिलः स्यात् तृतीयश्चतुर्थो दुर्भिक्षाय प्लव इति ततः शोभनो भूरितोयः ॥
अगले वर्ष फसलें और वर्षा कम होगी। तीसरा वर्ष बाढ़ के कारण बहुत विनाशकारी सिद्ध होगा और चौथे वर्ष में अकाल पड़ेगा। अंतिम वर्ष प्लव प्रचुर वर्षा के साथ शुभ सिद्ध होगा।
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