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बृहत्संहिता • अध्याय 8 • श्लोक 18
धूमाभेऽनावृष्टिः त्रिदशगुरौ नृपवधो दिवा दृष्टे । विपुलेऽमले सुतारे रात्रौ दृष्टे प्रजाः स्वस्थाः ॥
यदि दिन में बृहस्पति दृष्टि हो तो राजयोग होगा। यदि रात में उसका चक्र बड़ा और स्पष्ट दिखाई दे और वह शुभ चंद्र भवन में स्थित हो, तो पूरी दुनिया खुश होगी।
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