भाद्रपदे वल्लीजं निष्पत्तिं याति पूर्वसस्यं च ।
न भवत्यपरं सस्यं क्वचित् सुभिक्षं क्वचिग भयम् ॥
बृहस्पति के भाद्रपद वर्ष में लताओं (जैसे हरे चने) की पैदावार और पहली फसल अपने फल तक पहुंचेगी। साल में दूसरी फसल नहीं होगी। कुछ स्थानों पर ही अन्न प्रचुर मात्रा में होगा। अन्य भागों में घबराहट या भय रहेगा।
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