नवतिः सैव पडूना द्वादशहीना त्रिषट्कहीना च । नृपपुत्रमन्त्रिवलपतिपुरोधसां स्युर्ययासद्व्यम् ॥
राजपुत्र, मन्त्री, सेनापति और पुरोहित की शय्या क्रम से नब्बे, चौरासी, अठहत्तर और बहत्तर अंगुल लम्बी होनी चाहिये ।
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