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बृहत्संहिता • अध्याय 79 • श्लोक 8
कर्मावलं यवाष्टकमुदरासक्तं तुषैः परित्यक्तम्। अद्भुत्लशतं नृपाणां महती शय्या जयाय कृता ॥
तुषरहित आठ जी को परस्पर पेटा-पेटी करके मिलाने से एक कर्माद्भुत होता है तथा सौ कर्माद्रुततुत्य लम्बी शष्या राजाओं के जय के लिये होती है।
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