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बृहत्संहिता • अध्याय 79 • श्लोक 4
कण्टकिनो ये च स्युर्महानदीसङ्गमोद्भवा येच। सुरभवनजाश्च न शुभा ये चापरयाम्यदिक्पतिताः ॥
काँटे वाले, महानदी या देवालय में उत्पन्न तथा पश्चिम या दक्षिण दिशा में गिरे हुये सभी वृक्ष शय्या और आसन के लिये अशुभ होते हैं।
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