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बृहत्संहिता • अध्याय 79 • श्लोक 33
सूकरनयनं विषमं विवर्णमध्यर्धपर्वदीर्घ च। वामावर्त भिन्नं पर्वमितं वत्सनाभाख्यम् ॥३४।। कालकसंज्ञं
उडद के बराबर नील वर्ण का छिद्र हो तो कोलाक्ष, विषम, विवर्ण और डेड़ पर्व लम्बा छिद्र हो तो सूकरनयन, एक पर्व लम्बा वामावर्त छिद्र हो तो वत्सनाभ, काला छिद्र हो
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