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बृहत्संहिता • अध्याय 79 • श्लोक 31
निष्कुटमथ कोलाक्षं सूकरनयनं च वत्सनाभं च। कालकमन्यद्धन्युकमिति कथितश्छिद्रसंक्षेपः ॥
निष्कुट, कोलाक्ष, सूकरनयन, वत्सनाभ, कालक, धुन्धुक-ये संक्षेप से छिद्रों की संज्ञायें कही गई हैं।
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