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बृहत्संहिता • अध्याय 79 • श्लोक 3
अशनिजलानिलहस्तिप्रपातिता मधुविहङ्गकृतनिलयाः । चैत्यश्मशानपथिजोर्ध्वशुष्कवल्लीनिवद्धाश्च ॥
बिजली, जल, वायु या हाथी द्वारा गिराये हुये, मधुमक्खियों के छत्ते या पक्षियों के घोसलों वाले, चैत्य (प्रधान वृक्ष), श्मशान या मार्ग में स्थित तथा सूखो हुई लताओं से व्याप्त-ये सभी वृक्ष शय्या और आसन के लिये अशुभ होते हैं।
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