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बृहत्संहिता • अध्याय 79 • श्लोक 2
असनस्पन्दनचन्दनहरिद्रसुरदारुतिन्दुकीशालाः । काश्मर्यञ्जनपद्मकशाका वा शिंशपा च शुभाः ॥
विजयसार, स्पन्दन, हरिद्रा, देवदारु, तिन्दुकी, शाल, काश्मरी, अञ्जन, पद्मक, शाक, सिं- ये सभी वृक्ष शय्या और आसन के लिये शुभदायी होते हैं।
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