असनस्पन्दनचन्दनहरिद्रसुरदारुतिन्दुकीशालाः । काश्मर्यञ्जनपद्मकशाका वा शिंशपा च शुभाः ॥
विजयसार, स्पन्दन, हरिद्रा, देवदारु, तिन्दुकी, शाल, काश्मरी, अञ्जन, पद्मक, शाक, सिं- ये सभी वृक्ष शय्या और आसन के लिये शुभदायी होते हैं।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
बृहत्संहिता के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
बृहत्संहिता के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।