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बृहत्संहिता • अध्याय 79 • श्लोक 10
अर्थमतोऽष्टांशोनं विष्कम्भो विश्वकर्मणा प्रोक्तः । आयामत्र्यंशसमः पादोच्छ्रायः सकुक्ष्यशिराः ॥
शय्या की लम्बाई के आधे भाग में से उसके (आधे के) अष्टमांश घटा देने पर जो शेष बचे, तत्तुल्य शय्या की चौड़ाई होती है तथा चौड़ाई के तृतीयांशतुल्य कुक्षि और शिर के साथ पाये की ऊँचाई होती है; यह विश्वकर्मा का मत है।
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