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बृहत्संहिता • अध्याय 78 • श्लोक 8
स्पृष्ट्वाऽ थवालोक्य धुनोति गात्रं करोति गर्वं न रुणद्धि यान्तम् । चुम्बाविरामे वदनं प्रमार्टि पश्चात्समुत्तिष्ठति पूर्वसुप्ता ॥
पति को छूकर या देखकर शरीर को कंपाना, अभिमान करना, जाने के लिये तैयार पति को नहीं रोकना, पति को चूमने पर मुख पोंछ लेना, पति के सोने से पहले सोना और बाद में जागना- ये सब विरक्त खो की चेष्टायें हैं।
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