विरक्तचेष्टा भुकुटीमुखत्वं पराङ्मुखत्वं कृतविस्मृतिश्च । असम्भ्रमो दुष्परितोषता च तद्विष्टमैत्री परुषं च वाक्यम् ॥
भुकुटी चढ़ाना, पति की तरफ से मुँह फेर लेना, पति के किये हुये कार्यों को भूल जाना, पति का अनादर करना, बड़ी कठिनता से सन्तुष्ट होना, पति के शत्रु से मैत्री करना, कठोर बचन कहना,
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