प्रिय के गुणों का बखान करना, कान खुजाना-ये सब अनुरक्त खो की चेष्टायें हैं। वह अनुरक्त स्री प्रिय वचन बोलती है, प्रिय को अपना धन देतो है, देखकर प्रसत्र होती है और क्रोधरहित होकर गुणों को कहकर प्रिय के दोषों को छिपाती है।
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