अनुरक्त खियों के समस्त भाव (शरीर कांपना, मुख सूखना, मुख पीला पड़ जाना आदि) कामजनित स्नेह को कहते हैं। वह अपनी नाभि, भुज, छाती और भूषण दिखाती है तथा वस्त्र पहनना, केश बाँधना, बालों का छखोलना, भौहें चढ़ाकर कम्पित कटाक्ष से देखना- ये सब चिह प्रकाशित करती हैं।
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