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बृहत्संहिता • अध्याय 78 • श्लोक 3
स्नेहं मनोभवकृतं कथयन्ति भावा नाभीभुजस्तनविभूषणदर्शनानि। वस्त्राभिसंयमनकेशविमोक्षणानि भूक्षेपकम्पितकटाक्षनिरीक्षणानि ॥
अनुरक्त खियों के समस्त भाव (शरीर कांपना, मुख सूखना, मुख पीला पड़ जाना आदि) कामजनित स्नेह को कहते हैं। वह अपनी नाभि, भुज, छाती और भूषण दिखाती है तथा वस्त्र पहनना, केश बाँधना, बालों का छखोलना, भौहें चढ़ाकर कम्पित कटाक्ष से देखना- ये सब चिह प्रकाशित करती हैं।
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