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बृहत्संहिता • अध्याय 78 • श्लोक 25
न नखदशनविक्षतानि कुर्या- दृतुसमये पुरुषः स्त्रियाः कथञ्चित् । ऋतुरपि दश षट् च वासराणि प्रथमनिशात्रितयं न तत्र गम्यम् ॥२६॥ इति औवराहमिहिरकृतौ बृहत्संहितायां स्त्रीपुंससभायोगो नामाष्टसप्ततितमोऽध्यायः ॥
पुरुषो नरः स्त्रिया योषित ऋतुसमये गर्भाधानसमये कथञ्चित् कथमपि नखदशनविक्षतानि न कुर्यात् कारयेत्। अपिशब्दधायें। ऋतू रजः। दश पट् च षोडशवासराणि षोडशदिनानि भवन्ति। तत्र ऋतौ सति प्रथममादौ निशात्रितयं रात्रित्रितयं न गम्यम्। यतस्तत्र गर्भः खब- तोति ।
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