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बृहत्संहिता • अध्याय 78 • श्लोक 24
केन्द्रत्रिकोणेषु शुभस्थितेषु लग्ने शशाङ्के च शुभैः समेते । पापैत्रिलाभारिगतैश्च यायात् पुंजन्मयोगेषु च सम्प्रयोगम् ॥
जिस समय केन्द्र (१/४/७/१०) और त्रिकोण (५/९) स्थानों में शुभ ग्रह हों, लग्न, चन्द्र-दोनों शुभग्रहों से युत हों, तीसरे, ग्यारहवें और छठे में पाप ग्रह हों, उस समय तथा जातकोक्त पुञ्जन्म योग में स्त्रीप्रसीरु करना चाहिये ।
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