प्रऋतु से सम रात्रियों में पुरुष और विषम रात्रियों में त्रो को उत्पत्ति होती है। दूरस्थित सम रात्रियों ( छठी, आठवीं आदि सम रात्रियों) में दीर्घायु, सुन्दर और सुखो पुरुष उत्पन होता है।
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