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बृहत्संहिता • अध्याय 78 • श्लोक 2
एवं विरक्ता जनयन्ति दोषान् प्राणच्छिदोऽन्यैरनुकीर्तितैः किम् । रक्ताविरक्ताः पुरुषैरतोऽर्थात् परीक्षितव्याः प्रमदाः प्रयत्नात् ॥
इस तरह विरक्त खियाँ प्राणनाश करने वाले अनेक दोष उत्पत्र करती हैं, फिर अन्य दोष कहने की तो बात ही क्या है? इसलिये पुरुषों को प्रयत्नपूर्वक खियों की विरक्तता और अनुरक्तता को परीक्षा करनी चाहिये।
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