मांसानि यस्याश्च चलन्ति नार्या महोदरा खिक्खिमिनी च या स्यात् ।
स्त्रीलक्षणे याः कथिताश्च पापा- स्ताभिर्न कुर्यात् सह कामधर्मम् ॥
दुष्ट स्वभाव वाली तथा रति के समय की पीड़ा को नहीं सहन करने वालो खी को त्याग देना चाहिये। जिनके ऋतु का रक्त काला, नीला, पीला या ताम्रवर्ण हो, ये भी श्रेष्ठ त्रियाँ नहीं होती है। साथ ही बहुत सोने वाली, बहुत रक्तपित्त वालो, प्रवाहिनी, अधिक चात तथा कफ बाली, अधिक खाने बाली, पसीने से युक्त शरीर वाली, छोटे केश बाली, सफेद केश बाली, ढोले मांस बाली, बड़े पेट वाली, अस्पष्ट शब्द वाली, खीलक्षणाध्याय में कथित अशुभ लक्षणों से युत त्रियों के साथ भो रति नहीं करना चाहिये।
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