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बृहत्संहिता • अध्याय 78 • श्लोक 14
श्वासं मनुष्येण समं त्यजन्ती बाहूपधानस्तनदानदक्षा । सुगन्धकेशा सुसमीपरागा सुप्तेऽनुसुप्ता प्रथमं विबुद्धा ॥
पुरुष के साथ श्वास छोड़ने वाली, अपने बाहुरूप तकिये पर पति का शिर रखकर उसकी छाती से अपने स्तन को लगाने में चतुर, सुगन्धित केश वाली, पति के सो जाने पर सोने बालो और पहले जागने वाली ये गुणवती खी के लक्षण हैं।
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