मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
बृहत्संहिता • अध्याय 78 • श्लोक 12
स्त्रीणां गुणा यौवनरूपवेषदाक्षिण्यविज्ञानविलासपूर्वाः । श्री रत्नसंज्ञा च गुणान्वितासु श्रीव्याचयोऽन्याक्षतुरस्य पुंसः ॥
लियों के यौवन, रूप, घेष, चतुरता, ससशास्रोक्त कलाओं में कुशलता, बिलास (मधुर वचन, कटाक्ष-निश्क्षेपण आदि) कुणे हैं। चतुर पुरुष के लिये गुणों से युक्त स्त्री रत्नस्वरूपा तथा गुणरहित ही व्याधिरूपा होती है।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
बृहत्संहिता के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

बृहत्संहिता के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें